श्री शाम्भवी साधना – पांच दिवसीय साधना शिविर !

समस्त साधनाओं के लिए पंजिकरण खोल दिए गए हैं, अब आप वेबसाईट पर अपना खाता बनाकर साधनाओं हेतु पंजिकरण कर सकते हैं ! समस्त दीक्षा/साधना/अनुष्ठान एवं साधनापूर्व प्रशिक्षण की त्वरित जानकारियों हेतु हमारी मोबाईल ऐप इंस्टाल करें ! मोबाईल ऐप इंस्टाल करने हेतु क्लिक करें ! या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता, नमस्तस्यै, नमस्तस्यै, नमस्तस्यै नमो नमः । माँ भगवती आप सब के जीवन को अनन्त खुशियों से परिपूर्ण करें ।

इस साधना के लाभ :- “श्रीविद्या पूर्णाभिषेक दीक्षा” में दीक्षित हुआ साधक जब श्रीविद्या साधना प्रारम्भ करता है तो आयु की अधिकता, रोग, शारीरिक बल क्षीणता आदि किन्ही कारणों से साधक की ऊर्जा न्यून हो, और यदि साधक की ऊर्जा की न्यूनता के कारण साधनात्मक ऊर्जा ठीक से गति नहीं कर पा रही हो, तब केवल इस परिस्थिति में ही श्रीविद्या “पूर्णदीक्षा” में दीक्षित हुए साधक को यह शाम्भवी दीक्षा लेकर शाम्भवी साधना संपन्न करनी चाहिए ! तथा इस साधना के परिणाम स्वरूप “श्रीविद्या पूर्णाभिषेक दीक्षा” में दीक्षित हुए साधक की श्रीविद्या साधना निर्बाध संपन्न हो जाती है !

यह दीक्षा प्राप्त कर लेने के उपरान्त साधक दीक्षा के समय प्राप्त हुए मन्त्र एवं साधना विधान के अनुसार श्री ज्योतिर्मणि पीठ पर प्रकृति द्वारा निर्मित अनुकूल वातावरण में निर्बाध रहकर अपनी पांच दिवसीय साधना हमारे निर्देशन में संपन्न कर सकते हैं ।

अनिवार्य योग्यताएं :- शाम्भवी साधना केवल पूर्णाभिषेक, मंत्राभिषेक व शक्त्याभिषेक द्वारा श्रीविद्या साधना करने वाले साधकों के लिए ही अनुकूल होती है, शाम्भवी दीक्षा व साधना शिविर में केवल “श्रीविद्या पूर्णाभिषेक दीक्षा” में दीक्षित हुए अथवा “श्रीविद्या पूर्णाभिषेक दीक्षा” लेने वाले साधक ही सम्मिलित हो सकते हैं !

साधना अवधि :- नियमानुसार यह साधना पांच दिन में विधिवत् सम्पन्न होती है ! किन्तु साधना के नियमों में समझौतावादी, स्वेच्छाचारी साधक के लिए यह साधना अवधि अनन्त काल तक की भी हो सकती है !

उपस्थिति व पंजिकरण :- साधना हेतु साधना प्रारम्भ होने की तिथि से न्यूनतम सात दिवस पूर्व तक किया गया पंजिकरण ही मान्य होगा, तथा साधना की तिथि से एक दिवस पूर्व दोपहर तक श्री ज्योतिर्मणि पीठ पर उपस्थित होना अनिवार्य है ।

अनिवार्य :- पहचान व पते की पुष्टि के लिए किसी भी वैद्य अभिलेख की एक छायाप्रति व मूलप्रति तथा लाल, पीले, श्वेत, गुलाबी या बसंती रंग की एक धोती, एक गर्म चादर व लेखन सामग्री साथ में लाना अनिवार्य है !

व्यय :- व्यय हेतु आप अपनी सुविधानुसार निम्नलिखित विकल्पों में से किसी एक विकल्प का चयन कर सकते हैं ! सभी सज्जनों से विनम्र आग्रह है कि व्यय के लिए “विकल्प 1” का चयन करने का प्रयत्न करें ।

विकल्प 1 (स्वव्यवस्था) :- आपको अपनी दीक्षा/साधना सामग्री एवं रहन सहन की सभी व्यवस्थाएं स्वयं करने की स्वतंत्रता होती है, तथा आपको केवल 1/- रु (एक रुपया) मात्र दीक्षा/साधना की दक्षिणा के रूप में हमें देना होता है ।

विकल्प 2 (नि:शुल्क) :- निःशुल्क दीक्षा/साधना की सुविधा केवल विद्यार्थियों व सन्तों के लिए एवं निःशुल्क साधनापूर्व प्रशिक्षण शिविर में चिन्हित हुए गरीब/असहाय व्यक्तियों के लिए उपलब्ध है । दीक्षा हेतु उपस्थित होने पर आपको अपनी पहचान/ तथा विद्यार्थियों को वर्तमान में विद्यार्थी होने का वैद्य अभिलेख प्रदर्शित करना अनिवार्य होगा ।

विकल्प 3 (स:शुल्क) :- दीक्षा/साधना हेतु साधक की विश्राम, भोजन तथा दीक्षा सामग्री की सम्पूर्ण व्यवस्थाओं सहित प्रतिव्यक्ति कुल व्यय का अग्रिम भुगतान करना होता है ।


श्री ज्योतिर्मणि पीठ पर दीक्षा व साधना हेतु “पहले आओ-पहले पाओ” के आधार पर स्थान दिया जाता है, तथा निर्धारित संख्या पूर्ण होते ही नवीन पंजिकरण बंद कर दिए जाते हैं !
श्री ज्योतिर्मणि पीठ द्वारा महिलाओं को दीक्षा/साधना प्रदान नहीं की जाती है, यह हमारा व्यक्तिगत विषय है, अतः इस पर कोई प्रश्न न करें ।