विशेष पूजा विधि !

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प्राणायाम आचमन आदि कर आसन पूजन करें :- ॐ अस्य श्री आसन पूजन महामन्त्रस्य कूर्मो देवता मेरूपृष्ठ ऋषि पृथ्वी सुतलं छंद: आसन पूजने विनियोग: । विनियोग हेतु जल भूमि पर गिरा दें ।

पृथ्वी पर रोली से त्रिकोण का निर्माण कर इस मन्त्र से पंचोपचार पूजन करें – ॐ पृथ्वी त्वया धृता लोका देवी त्वं विष्णुनां धृता त्वां च धारय मां देवी पवित्रां कुरू च आसनं ।ॐ आधारशक्तये नम: । ॐ कूर्मासनायै नम: । ॐ पद्‌मासनायै नम: । ॐ सिद्धासनाय नम: । ॐ साध्य सिद्धसिद्धासनाय नम: ।

1:- ॐ सद्यो जातं प्रद्यामि सद्यो जाताय वै नमो नमः ! भवे भवे नाति भवे भवस्य मां भवोद्भवाय नमः !! इस मन्त्र से दुग्ध स्नान कराएं !

2:- ॐ वामदेवाय नमः जयेष्ठाय नमः श्रेष्ठाय नमः रुद्राय नमः कालाय नमः कल विकरणाय नमः बलाय नमः !

बल प्रमथनाय नमः बलविकरणाय नमः सर्वभूत दमनाय नमः मनोनमनाय नमः !! इस मन्त्र से दही स्नान कराएं !

3:- ॐ अघोरेभ्योथघोरेभ्यो घोर घोर तरेभ्य: सर्वेभ्य: सर्व शर्वेभया नमस्ते अस्तु रुद्ररूपेभ्य: !! इस मन्त्र से घी स्नान कराएं !

4:- ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात !! इस मन्त्र से शहद स्नान कराएं !

5:- ॐ ईशानः सर्व विद्यानमीश्वर सर्वभूतानाम ब्रह्माधिपति ब्रह्मणो अधिपति ब्रह्मा शिवो मे अस्तु सदा शिवोम !! इस मन्त्र से शक्कर स्नान कराएं !

6:- ॐ सहस्रशीर्षा पुरुषः सहस्राक्षः सहस्रपात्। स भूमिं विश्वतो वृत्वात्यतिष्ठद्दशांगुलमं ॥ इस मन्त्र से जल से स्नान कराएं !

7:- पुरुष एवेदम् यत् भूतम् यच्च भव्यम्। उतामृतत्वस्येशानो यदह्नेना तिरोहति ॥ इस मन्त्र से वस्त्र से पोंछें !

8:- एतावानस्य महिमातो ज्यायांश्च पूरुषः। पादोऽस्य विश्वा भूतानि त्रिपादस्यामृतं दिवि ॥ इस मन्त्र से रोली का तिलक लगाएं !

9:- त्रिपादूर्द्ध्वः उदैत् पुरुषः पादोस्येहा पुनः। ततो विष्वङ् व्यक्रामच्छाशनान शने अभि ॥ इस मन्त्र से रोली पर चावल लगाएं !

10:- तस्मात् विराडजायत विराजो अधिपूरुषः। सजातो अत्यरिच्यत पश्चात् भूमिमथॊ पुरः ॥ इस मन्त्र से पुष्प चढ़ाएं !

11:- यत् पुरुषेण् हविषा देवा यज्ञमतन्वत। वसन्तो अस्या सीदाज्यम् ग्रीष्म इद्ध्म शरधवि ॥ इस मन्त्र से धूप दिखाएं !

12:- सप्तास्यासन्परिधयस्त्रिः सप्त समिधः कृताः। देवा यद्यज्ञं तन्वाना अबध्नन्पुरुषं पशुं ॥ इस मन्त्र से दीपक दिखाएं !

13:- तं यज्ञं बर्हिषि प्रौक्षन्पुरुषं जातमग्रतः। तेन देवा अयजन्त साध्या ऋषयश्च ये ॥ इस मन्त्र से नैवेद्य का भोग लगाएं !

14:- तस्माद्यज्ञात्सर्वहुतः संभृतं पृषदाज्यं। पशून्तांश्चक्रे वायव्यानारण्यान्ग्राम्याश्च ये ॥ इससे आगे के मन्त्रों से आरती उतारें !

15:- तस्माद्यज्ञात्सर्वहुत ऋचः सामानि जज्ञिरे। छंदांसि जज्ञिरे तस्माद्यजुस्तस्मादजायत ॥

16:- तस्मादश्वा अजायंत ये के चोभयादतः। गावो ह जज्ञिरे तस्मात्तस्माज्जाता अजावयः ॥

17:- यत्पुरुषं व्यदधुः कतिधा व्यकल्पयन्। मुखं किमस्य कौ बाहू का उरू पादा उच्येते ॥

18:- ब्राह्मणोऽस्य मुखामासीद्वाहू राजन्यः कृतः। ऊरू तदस्य यद्वैश्यः पद्भ्यां शूद्रो अजायत ॥

19:- चंद्रमा मनसो जातश्चक्षोः सूर्यो अजायत। श्रोत्राद्वायुश्च प्राणश्च मुखादग्निर्जायते ॥

20:- नाभ्या आसीदंतरिक्षं शीर्ष्णो द्यौः समवर्तत। पद्भ्यां भूमिर्दिशः श्रोत्रात्तथा लोकाँ अकल्पयन् ॥

21:- यज्ञेन यज्ञमयजंत देवास्तानि धर्माणि प्रथमान्यासन्। ते ह नाकं महिमानः सचंत यत्र पूर्वे साध्याः संति देवा: ॥ इस मन्त्र से पुष्पांजलि समर्पित करके प्रणाम कर लें !