श्री विष्णु सहस्रनाम स्तोत्र के पाठ का महत्व !

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श्री विष्णु सहस्रनाम स्तोत्र का श्रद्धा भाव से किया गया पाठ अद्भुत शक्तियां प्रदान करता है !

श्री विष्णु सहस्रनाम की उत्पत्ति महाभारत से मानी जाती है, जब पितामह भीष्म, पांडवों से घिरे मृत्यु शैय्या पर अपनी मृत्यु का इंतजार कर रहे थे, उस समय युधिष्ठिर ने उनसे पूछा, ” हे पितामह ! कृपया हमें बताएं कि सभी के लिए सर्वोच्च आश्रय कौन है ? जिससे व्यक्ति को शांति प्राप्त हो सके, वह नाम कोनसा है जिससे इस भवसागर से मुक्ति प्राप्त हो सके, इस सवाल के जबाब में भीष्म ने कहा की वह नाम विष्णु सहस्रनाम है ।

यह नकारात्मक ज्योतिषीय प्रभावों को वश में करने में मदद करता है, इनमें उन दोषों को शामिल किया जाता है जो जन्म समय की ग्रहों की खराब स्थिति से उत्पन्न होते हैं, विष्णु सहस्त्रनाम दुर्भाग्य और श्राप से दूर कर सकता है । जो व्यक्ति विष्णु सहस्त्रनाम का जाप करता है उसका भाग्य हमेशा उसका साथ देता है ।

इसका मनोवैज्ञानिक लाभ भी है , दैनिक विष्णु सहस्रनाम का जप करते हुए मन को काफी आराम मिलता हैं और अवांछित चिंताओं और विचलित करने वाले विचारों से मुक्ति मिलती है, इससे मन में सकारात्मक पहलुओं पर ध्यान केंद्रित करने और कुशलता सीखने की शक्ति प्राप्त होती है ।

श्री विष्णु सहस्त्रनाम अपने जीवन में बाधाओं को दूर करने का अंतिम उपाय है, यह आपके जीवन में मौजूद महत्वपूर्ण योजनाओं को तेज़ी से और आपके रास्ते पर बाधाओं और चुनौतियों को दूर करने में मदद कर सकता है, बढ़ती ऊर्जा स्तर और आत्मविश्वास के साथ, आप अपने जीवन के लक्ष्यों की ओर जल्दी और ऊर्जावान रूप से आगे बढ़ सकते हैं ।