प्रत्यक्ष उर्वशी व रम्भा अप्सरा तीव्र सिद्धि अनुष्ठान – पांच दिवसीय विशेष अनुष्ठान !

समस्त साधनाओं के लिए निःशुल्क साधना पूर्व प्रशिक्षण शिविर के पंजिकरण को आम जनमानस के लिए खोल दिया गया है, अब आप निःशुल्क साधना पूर्व प्रशिक्षण हेतु पंजिकरण कर सकते हैं ! कोरोना संक्रमण से देश को राहत मिलते ही पंजिकृत साधकों को आमन्त्रित कर लिया जाएगा ! समस्त दीक्षा/साधना/अनुष्ठान एवं साधनापूर्व प्रशिक्षण की त्वरित जानकारियों हेतु हमारी मोबाईल ऐप इंस्टाल करें ! मोबाईल ऐप इंस्टाल करने हेतु क्लिक करें ! या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता, नमस्तस्यै, नमस्तस्यै, नमस्तस्यै नमो नमः । माँ भगवती आप सब के जीवन को अनन्त खुशियों से परिपूर्ण करें ।

इस अनुष्ठान के लाभ :- “साधना” की अपेक्षा “अनुष्ठान” सम्पन्न करना अत्यन्त सरल होता है, जिसे कोई भी व्यक्ति किसी विशेष योग्यता के बिना ही सम्पन्न कर अपने लक्ष्य को प्राप्त कर लेता है ! साधना हेतु साधनाकाल में आसन, एकाग्रता व ब्रह्मचर्य आदि को स्थिर रखने की प्राथमिक आवश्यकता होती है जिस कारण साधना को प्रत्येक व्यक्ति आसानी से सम्पन्न नहीं कर पाता है ! इसके साथ ही जहां अनेक बार साधना सम्पन्न करने पर भी सफलता नहीं मिल पाती है वहीँ विधिवत् किया गया अनुष्ठान एक बार में ही सफल हो जाता है और साधक अपने लक्ष्य को प्राप्त कर लेता है !

अपने जीवन में अभिनय, नृत्य, मॉडलिंग, गायन, संगीत व सभी प्रकार की ललित कलाओं के क्षेत्र में पूर्णता के साथ सफल होने की क्षमता, रंग, रूप, सौन्दर्य, उत्तम यौवन, उत्तम पौरुष शक्ति, मधुर स्वर, नाट्य अभिनय की कला, आकर्षण की क्षमता, गीत संगीत की विद्या, बहुआयामी आंतरिक क्षमताओं में वृद्धि, तथा आकर्षक व्यक्तित्व, मन के अनुकूल जीवन साथी, कार्यक्षेत्र में मन के अनुकूल अधिकारी या सहकर्मी, व्यवसायिक व सामाजिक क्षेत्र में विशेष प्रतिष्ठा व ख्याति तथा जीवन में सभी प्रकार के प्रेम सौहार्द में पूर्णता प्राप्त करने के उद्देश्य से यह अनुष्ठान सम्पन्न किया जाता है !

इस अनुष्ठान के अन्त में उर्वशी अथवा रम्भा अप्सरा अपने साधक को प्रत्यक्ष दर्शन व आजीवन सहयोग करने का वचन देकर अन्तर्ध्यान हो जाती है !

अनुष्ठान के अन्त में उर्वशी अथवा रम्भा अप्सरा के द्वारा भविष्य में साधक की आवश्यकतानुसार सामाजिक, धर्म व नैतिक सीमाओं अन्दर रहते हुए अपने अधिकार क्षेत्र के अधीन सहयोग करने का वचन देने के समय ही अन्तिम बार प्रत्यक्ष दर्शन दिया जाता है, इसके बाद उर्वशी अथवा रम्भा अप्सरा के अधिकार क्षेत्र के अधीन अनेक प्रकार से मार्ग प्रशस्त होकर क्षमताओं की वृद्धि व पूर्णता के साथ सहयोग व सफलता प्राप्त होती है !

अनुष्ठान :- उर्वशी अथवा रम्भा अप्सरा में से साधक की इच्छा या आवश्यकतानुसार किसी एक की ही दीक्षा देकर अनुष्ठान सम्पन्न कराया जायेगा ।

इस अनुष्ठान की तिथी, समय, व्यय एवं पंजिकरण सम्बन्धी जानकारी हमारी मोबाईल ऐप पर उपलब्ध है ।


श्री ज्योतिर्मणि पीठ पर दीक्षा व साधना हेतु “पहले आओ-पहले पाओ” के आधार पर स्थान दिया जाता है, तथा निर्धारित संख्या पूर्ण होते ही नवीन पंजिकरण बंद कर दिए जाते हैं !
श्री ज्योतिर्मणि पीठ द्वारा महिलाओं को दीक्षा/साधना प्रदान नहीं की जाती है, यह हमारा व्यक्तिगत विषय है, अतः इस पर कोई प्रश्न न करें ।