।। इस पृष्ठ पर लिखी गई निःशुल्क श्री कमला (राजराजेश्वरी) महाविद्या साधना पद्धति में यज्ञ विधान अनिवार्य नहीं होने के कारण यह निःशुल्क साधना है !।। ।। निःशुल्क श्री कमला (राजराजेश्वरी) महाविद्या साधना सत्र के प्रारम्भ होने की आगामी तिथी दिनांक 02/10/2025 है, तथा इस साधना हेतु पन्जिकरण करने कि अन्तिम तिथी दिनांक 25/09/2025 है !।। इस साधना के लाभ :- श्री कमला (राजराजेश्वरी) महाविद्या की इस साधना को संपन्न करने…
अधिक पढ़ें।। इस पृष्ठ पर लिखी गई निःशुल्क श्री त्रिपुरसुन्दरी महाविद्या साधना पद्धति में यज्ञ विधान अनिवार्य नहीं होने के कारण यह निःशुल्क साधना है !।। ।। निःशुल्क श्री त्रिपुरसुन्दरी महाविद्या साधना सत्र के प्रारम्भ होने की आगामी तिथी दिनांक 27/09/2025 है, तथा इस साधना हेतु पन्जिकरण करने कि अन्तिम तिथी दिनांक 20/09/2025 है !।। इस साधना के लाभ :- श्री त्रिपुरसुन्दरी महाविद्या की इस साधना को संपन्न करने से इस साधना…
अधिक पढ़ें।। इस पृष्ठ पर लिखी गई निःशुल्क श्री षोडशी महाविद्या साधना पद्धति में यज्ञ विधान अनिवार्य नहीं होने के कारण यह निःशुल्क साधना है !।। ।। निःशुल्क श्री षोडशी महाविद्या साधना सत्र के प्रारम्भ होने की आगामी तिथी दिनांक 22/09/2025 है, तथा इस साधना हेतु पन्जिकरण करने कि अन्तिम तिथी दिनांक 15/09/2025 है !।। इस साधना के लाभ :- श्री षोडशी महाविद्या की इस साधना को संपन्न करने से इस साधना…
अधिक पढ़ें।। इस पृष्ठ पर लिखी गई निःशुल्क श्रीविद्या पूर्णाभिषेक साधना हेतु पन्जिकरण करने की अनुमति केवल विद्यार्थियों व सन्तों के लिए एवं निःशुल्क साधनापूर्व प्रशिक्षण शिविर में चिन्हित हुए गरीब/असहाय व्यक्तियों के लिए है !।। ।। निःशुल्क श्रीविद्या पूर्णाभिषेक साधना सत्र के प्रारम्भ होने की आगामी तिथी दिनांक 22/09/2025 है, तथा इस साधना हेतु पन्जिकरण करने कि अन्तिम तिथी दिनांक 15/09/2025 है !।। श्री ज्योतिर्मणि पीठ द्वारा मूलतः श्री ह्यग्रीव सम्प्रदाय…
अधिक पढ़ेंधन्यवाद ! आपके द्वारा दीक्षा/साधना/अनुष्ठान/अनुदान हेतु धन का भुगतान किया गया है, तथा पंजिकरण व भुगतान सम्बंधित जानकारी आपके द्वारा प्रयुक्त ईमेल एवं मोबाईल नं पर 5 मिनट के अन्दर भेज दी जाती है ! कृपया ध्यान पूर्वक पढ़ें ! आपकी और से भुगतान सफल होने पर आपके ईमेल पर भुगतान सम्बंधित जानकारी में एक Order नं (जैसे – #Diksha_xxxxxx), CCAvenue Reference# नं ओर Bank Ref# नं प्राप्त होने पर ही…
अधिक पढ़ेंॐ न मन्त्रं नो यन्त्रं तदपि च न जाने स्तुतिमहो न चाह्वानं ध्यानं तदपि च न जाने स्तुतिकथा:। न जाने मुद्रास्ते तदपि च न जाने विलपनं परं जाने मातस्त्वदनुसरणं क्लेशहरणम्॥1॥ विधेरज्ञानेन द्रविणविरहेणालसतया विधेयाशक्यत्वात्तव चरणयोर्या च्युतिरभूत्। तदेतत् क्षन्तव्यं जननि सकलोद्धारिणि शिवे कुपुत्रो जायेत क्व चिदपि कुमाता न भवति॥2॥ पृथिव्यां पुत्रास्ते जननि बहव: सन्ति सरला: परं तेषां मध्ये विरलतरलोहं तव सुत:। मदीयोऽयं त्याग: समुचितमिदं नो तव शिवे कुपुत्रो जायेत क्व चिदपि कुमाता न…
अधिक पढ़ेंअथ श्री तान्त्रोक्त रात्रि सूक्तम् ॥ ॐ विश्वेश्वरीं जगद्धात्रीं स्थितिसंहारकारिणीम् । निद्रां भगवतीं विष्णोरतुलां तेजसः प्रभुः ॥१॥ ब्रह्मोवाच त्वं स्वाहा त्वं स्वधा त्वं हि वषट्कारः स्वरात्मिका । सुधा त्वमक्षरे नित्ये त्रिधा मात्रात्मिका स्थिता ॥२॥ अर्धमात्रास्थिता नित्या यानुच्चार्या विशेषतः । त्वमेव सन्ध्या सावित्री त्वं देवि जननी परा ॥३॥ त्वयैतद्धार्यते विश्वं त्वयैतत्सृज्यते जगत् । त्वयैतत्पाल्यते देवि त्वमत्स्यन्ते च सर्वदा ॥४॥ विसृष्टौ सृष्टिरुपा त्वं स्थितिरूपा च पालने । तथा संहृतिरूपान्ते जगतोऽस्य जगन्मये ॥५॥ महाविद्या…
अधिक पढ़ेंॐ नमो देव्यै महादेव्यै शिवायै सततं नमः । नमः प्रकृत्यै भद्रायै नियताः प्रणताः स्म ताम् । । ९ । । रौद्रायै नमो नित्यायै गौर्यै धात्र्यै नमो नमः । ज्योत्स्नायै चेन्दुरूपिण्यै सुखायै सततं नमः । । १० । । कल्याण्यै प्रणतां वृद्ध्यै सिद्ध्यै कुर्मो नमो नमः । नैर्ऋत्यै भूभृतां लक्ष्म्यै शर्वाण्यै ते नमो नमः । । ११ । । दुर्गायै दुर्गपारायै सारायै सर्वकारिण्यै । ख्यात्यै तथैव कृष्णायै धूम्रायै सततं नमः । ।…
अधिक पढ़ें!! संस्कृत !! । ध्यानम् । ॐ बालार्कमण्डलाभासां चतुर्बाहुं त्रिलोचनाम् । पाशाङ्कुशवराभीतीर्धारयन्तीं शिवां भजे । । ‘ॐ’ ऋषिरुवाच । । १ । । एतत्ते कथितं भूप देवीमाहात्म्यमुत्तमम् । । २ । । एवम्प्रभावा सा देवी ययेदं धार्यते जगत् । विद्या तथैव क्रियते भगवद्विष्णुमायया । । ३ । । तया त्वमेष वैश्यश्च तथैवान्ये विवेकिनः । मोह्यन्ते मोहिताश्चैव मोहमेष्यन्ति चापरे । । ४ । । तामुपैहि महाराज शरणं परमेश्वरीम् । आराधिता सैव नृणां…
अधिक पढ़ें!! संस्कृत !! । ध्यानम् । ॐ विद्युद्दामसमप्रभां मृगपतिस्कन्धस्थितां भीषणां, कन्याभिः करवालखेटविलसद्धस्ताभिरासेविताम् । हस्तैश्चक्रगदासिखेटविशिखांश्चापं गुणं तर्जनीं, बिभ्राणामनलात्मिकां शशिधरां दुर्गां त्रिनेत्रां भजे । । ‘ॐ’ देव्युवाच । । १ । । एभिः स्तवैश्च मां नित्यं स्तोष्यते यः समाहितः । तस्याहं सकलां बाधां नाशयिष्याम्यसंशयम् । । २ । । मधुकैटभनाशं च महिषासुरघातनम् । कीर्तयिष्यन्ति ये तद्वद्वधं शुम्भनिशुम्भयोः । । ३ । । अष्टभ्यां च चतुर्दश्यां नवम्यां चैकचेतसः । श्रोष्यन्ति चैव ये भक्त्या मम…
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